सुबह ए बनारस

गंगा नदी के किनारे बसे उत्तर प्रदेश के इस शहर को बनारस या काशी भी कहा जाता है। वैसे , इसे देश की सांस्कृतिक राजधानी भी माना जाता है। हिंदू धर्म में इस शहर की खास मान्यता है और इस शहर में इतने मंदिर हैं कि हर सड़क से गुजरते हुए आपको एक मंदिर जरूर नजर आएगा। काशी विश्वनाथ मंदिर या गोल्डन टेंपल को 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने बनवाया था। यह यहां का सबसे मशहूर मंदिर है और यहां के शिवलिंग को लेकर लोगों में इसकी गहरी आस्था है। काल भैरव मंदिर , नेपाली हिंदू मंदिर , तुलसी मानस मंदिर , राम नगर फोर्ट वगैरह भी देखें।
यहां के दुर्गा मंदिर को लोग बहुत मानते हैं , तो वाराणसी के घाटों पर तो दुनिया भर का मेला रहता है।

शाम के समय गंगा किनारे होने वाली आरती का पर्यटकों के बीच खासा क्रेज है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों लिए भी यह शहर काफी मायने रखता है और उनके चार तीर्थ स्थलों में से एक है। भगवान बुद्ध से जुड़े कुछ अवशेष आपको आज भी यहां देखने को मिलेंगे। बता दें कि वाराणसी में देखने के लिए ऐसा खास कुछ नहीं है , लेकिन वहां के हर कोने को महसूस करते हुए वहां घूमना ही सही मायने में वाराणसी को देखना है। 


वहां आप आटो रिक्शा या रिक्शा से घूम सकते हैं। दिल्ली से वाराणसी की दूरी 776 किमी है। यहां आप बस , ट्रेन या हवाई मार्ग से आ सकते हैं। वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा मुख्य शहर से 25 किमी दूर है , तो मुगल सराय यहां का मुख्य रेलवे जंक्शन है। ठहरने व खाने के मामले में आपको किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी।