इटली की राजधानी रोम दुनिया के उन पुराने शहरों में से है, जहां से सभ्यताओं का विकास हुआ है। यही वजह है कि इसकी छाप वेस्टर्न सिविलाइजेशन पर नजर आती है। ताइबर नदी पर बसा रोम, रोमन कैथलिक धर्म के अनुयायियों के लिए तीर्थ स्थान है, क्योंकि इस धर्म के प्रमुख 'पोप' का निवास स्थल रोम में ही है।
इतिहास
विश्व प्रसिद्ध जूलियस सीजर, नीरो और मुसोलिनी के इस भव्य नगर की स्थापना लगभग 753 ईसा पूर्व में हुई थी। रोम बसने से जुड़ी एक कहानी के अनुसार, मंगल देवता के दो जुड़वां पुत्र थे - रोमुलस और रिमस। एक बार ताइबर नदी में बाढ़ आने से ये दोनों बहते हुए 'पेलेटाइन' पहाड़ी के पास पहुंच गए। इन बच्चों को एक मादा भेडि़या ने दूध पिलाया व एक चरवाहे ने दोनों को पाला। बड़े होकर इन दोनों भाइयों ने एक नगर की स्थापना की, जिसका नाम 'रोमुलस' के नाम पर ' रोम' रखा गया व रोमुलस इसके सम्राट बने।
रोम की स्थापना
प्राचीन रोम सात पहाड़ियों पर बसा हुआ था। चौथी शताब्दी में इसके चारों ओर एक दीवार, सरवियल वॉल बनाई गई। इसके अवशेष आज भी रोम के आस-पास देखे जा सकते हैं।
दर्शनीय स्थल
प्राचीन इमारतों और उनके अवशेषों के लिए रोम दुनिया भर में मशहूर है। आलीशान राजमहल, भव्य चर्च, खूबसूरत फव्वारे, गुंबज व म्यूजिम्स वाला यह शहर आपको पहली नजर में ही सम्मोहित करने का जादू रखता है।
विक्टर इमेनुएल द्वितीय का स्मारक
इटली के शासक, विक्टर इमेनुएल द्वितीय को समर्पित सफेद संगमरमर की यह विशाल और बेमिसाल इमारत 1885 में बनना शुरू हुई थी और इसका काम 1911 में पूरा हुआ। इसके सामने सम्राट इमेनुएल की घोड़े पर सवार एक मूर्ति बनी है, जिसे बनाने में 20 साल लगे। यहां प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए अज्ञात सैनिकों को दफनाया गया था। इस स्मारक की नक्काशी और इस पर बने विजय चिन्ह दर्शनीय हैं। यहीं एक संग्रहालय भी है। अगर आप कलाकृतियों में दिलचस्पी रखते हैं, तो उसे जरूर देखें।
पिएजा वेनेजिया
स्मारक के साथ ही सिर्फ रोम का ही नहीं बल्कि इटली का महशूर और शानदार चौक 'पिएजा वेनेजिया' है। रोम के बीचोंबीच बना यह चौक दिल्ली के विजय चौक जैसा ही प्रसिद्ध है। इसके अलावा, 'पियात्सा डी स्पाग्ना' भी पर्यटकों में खूब लोकप्रिय है और जहां लोग शाम को एक-दूसरे से मिलने आते हैं।
विया डेल कोर्सों
'पिएजा वेनेजिया' का लुत्फ उठाने के बाद आप रोम की महूर सड़क यानी 'विया डेल कोर्सों' भी जरूर जाएं। यहां बनीं बड़ी-बड़ी दुकानें,चर्च और पैलेस इस सड़क की भव्यता में चार चांद लगाते हैं। गौरतलब है कि यह सड़क रोम का मुख्य मार्ग है।
कैपिटोलाइन
यह अद्वितीय इमारत 'कैपिटोलाइन हिल' पर बनी है और काफी उंचाई पर स्थित है। इस पर चढ़ने की सीढ़ियों को मशहूर मूर्तिकार माइकल एंजलो ने 1536 में बनाया था। कैपिटोलाइन के सामने घोड़े पर सवार सम्राट मार्कस ओरेलिअस की पीतल की मूर्ति है, जिन्होंने 160-180 ई. तक रोम पर शासन किया था। यह भव्य मूर्ति आपको आश्चर्यचकित कर देगी। इसके अलावा, कैपिटोलाइन पर बना टॉवर भी इस इमारत की अलग पहचान
है। 'कैपिटोलाइन कॉम्प्लेक्स' में एक चर्च, म्यूजियम और पुराना मंदिर भी बना हुआ है।
कॉलोसियम
रोम का प्रतीक है कॉलोसियम। इस विशाल अखाड़े का निर्माण 80 ईस्वी में हुआ था और यहां 50 हजार दर्शक एक साथ बैठ सकते थे। कॉलोसियम में ग्लैडिएटर यानी तलवारबाज अपने करतब दिखाते थे। ये आपस में ही नहीं, बल्कि जंगली जानवरों से भी मुकाबला करते थे। दिल दहला देने वाली ये लड़ाइयां ,चाहें दूसरे तलवारियों से हो या जानवरों से, तब तक जारी रहती थीं, जब तक कि लड़नेवाले में से एक की मौत न हो जाए। हालांकि अब इस अखाड़े के भी अवशेष ही बाकी हैं, लेकिन अतीत की कहानियां ये बखूबी सुनाते हैं। बेशक यहां जाने के बाद तलवारों की खनक और जानवरों की दहाड़ को आप पूरे माहौल में महसूस कर सकेंगे।
फोरम रोमैनम
प्राचीन रोम में बहुत सारे 'फोरम' हुआ करते थे। बताते चलें कि मिलने-जुलने की जगहों को रोम में फोरम कहा जाता है। यहीं शहर की तमाम सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनैतिक वगैरह गतिविधियां हुआ करती थीं। इनमें सबसे ज्यादा मशहूर फोरम रोमैनम था और इस जगह पर आज भी राजभवन, मंदिरों और स्तंभों के अवशेष मौजूद हैं। बेशक इन्हें देखकर प्राचीन रोम की भव्यता का अंदाजा बखूबी हो जाता है।
पैंथियॉन
यह अद्भुत प्राचीन मन्दिर 27 ईसा पूर्व में बना था। इसके विशाल गुंबज के मध्य में 30 फुट का खुला स्थान है। इस जगह की वजह से भक्तों को ऐसा महसूस होता था, मानों उनकी प्रार्थनाएं सीधे देवताओं तक पहुंच रही हैं। मंदिर के अंदर चारों ओर देवी-देवताओं की मूतिर्यों बनी हुई हैं। वैसे, 601 ईस्वी में इस मंदिर को चर्च बना दिया गया था।
विला बोर्गीस
वैसे तो रोम में बहुत सारे बाग-बगीचे हैं, लेकिन विला बोर्गीस बेमिसाल है। इसलिए रोम जाने पर इसे देखना नहीं भूलें। यहां बने म्यूजियम में भी जरूर जाएं, क्योंकि इसे मिस करने पर आप बेहतरीन मूर्तिकला से रूबरू होने का मौका गवां देंगे। यहां निर्मित मूर्तियां अद्वितीय हैं और इतीन सजीव लगती हैं कि मानो अभी बोल पड़ेंगी। यहां नेपोलियन प्रथम की बहन पॉलिन, जिनका विवाह बोर्गीस राजपरिवार में हुआ था, की पलंग पर लेटी हुई एक मूर्ति इतनी सजीव लगती है कि आप कुछ पल इसे एकटक देखे बिना रह नहीं पाएंगे।
त्रेवी फांउंटेन
रोम के खास आर्कषण इसके फाउंटेंस हैं। यहां लगभग 300 इमारतें ऐसी हैं, जिनमें शानदार फव्वारे बने हुए हैं। यहां का सबसे प्रसिद्ध फव्वारा है 'त्रेवी फांउंटेन'। ऐसी मान्यता है कि अगर रोम में कोई दोबारा आना चाहे, तो उसे इस मनोकामना के साथ एक सिक्का फव्वारे में डालना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से यह ख्वाहिश जरूर पूरी होती है।
वैटिकन सिटी
इस प्राचीन नगरी की यात्रा तब तक पूरी नहीं होगी, जब तक कि आप 'वैटिकन सिटी' न देख लें। छठी शताब्दी से यह स्थल रोमन कैथोलिक धर्म के अनुयायियों के सर्वोच्च धार्मिक प्रमुख 'पोप' का निवास स्थान रहा है। हालांकि यह रोम ही में है, लेकिन 1926 से इसे एक स्वतंत्र शहर का दर्जा दे दिया गया था। वैटिकन सिटी का मशहूर सेंट पीटर चर्च,
सेंट पीटर स्क्वेयर, फव्वारे, संग्रहालय वगैरह जरूर देखें। बेशक ये आपको एक अलग ही दुनिया का नजारा दिखाएंगे और आपको हमेशा याद रखने वाला अनुभव देंगे।
इतिहास
विश्व प्रसिद्ध जूलियस सीजर, नीरो और मुसोलिनी के इस भव्य नगर की स्थापना लगभग 753 ईसा पूर्व में हुई थी। रोम बसने से जुड़ी एक कहानी के अनुसार, मंगल देवता के दो जुड़वां पुत्र थे - रोमुलस और रिमस। एक बार ताइबर नदी में बाढ़ आने से ये दोनों बहते हुए 'पेलेटाइन' पहाड़ी के पास पहुंच गए। इन बच्चों को एक मादा भेडि़या ने दूध पिलाया व एक चरवाहे ने दोनों को पाला। बड़े होकर इन दोनों भाइयों ने एक नगर की स्थापना की, जिसका नाम 'रोमुलस' के नाम पर ' रोम' रखा गया व रोमुलस इसके सम्राट बने।
रोम की स्थापना
प्राचीन रोम सात पहाड़ियों पर बसा हुआ था। चौथी शताब्दी में इसके चारों ओर एक दीवार, सरवियल वॉल बनाई गई। इसके अवशेष आज भी रोम के आस-पास देखे जा सकते हैं।
दर्शनीय स्थल
प्राचीन इमारतों और उनके अवशेषों के लिए रोम दुनिया भर में मशहूर है। आलीशान राजमहल, भव्य चर्च, खूबसूरत फव्वारे, गुंबज व म्यूजिम्स वाला यह शहर आपको पहली नजर में ही सम्मोहित करने का जादू रखता है।
विक्टर इमेनुएल द्वितीय का स्मारक
इटली के शासक, विक्टर इमेनुएल द्वितीय को समर्पित सफेद संगमरमर की यह विशाल और बेमिसाल इमारत 1885 में बनना शुरू हुई थी और इसका काम 1911 में पूरा हुआ। इसके सामने सम्राट इमेनुएल की घोड़े पर सवार एक मूर्ति बनी है, जिसे बनाने में 20 साल लगे। यहां प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए अज्ञात सैनिकों को दफनाया गया था। इस स्मारक की नक्काशी और इस पर बने विजय चिन्ह दर्शनीय हैं। यहीं एक संग्रहालय भी है। अगर आप कलाकृतियों में दिलचस्पी रखते हैं, तो उसे जरूर देखें।
पिएजा वेनेजिया
स्मारक के साथ ही सिर्फ रोम का ही नहीं बल्कि इटली का महशूर और शानदार चौक 'पिएजा वेनेजिया' है। रोम के बीचोंबीच बना यह चौक दिल्ली के विजय चौक जैसा ही प्रसिद्ध है। इसके अलावा, 'पियात्सा डी स्पाग्ना' भी पर्यटकों में खूब लोकप्रिय है और जहां लोग शाम को एक-दूसरे से मिलने आते हैं।
विया डेल कोर्सों
'पिएजा वेनेजिया' का लुत्फ उठाने के बाद आप रोम की महूर सड़क यानी 'विया डेल कोर्सों' भी जरूर जाएं। यहां बनीं बड़ी-बड़ी दुकानें,चर्च और पैलेस इस सड़क की भव्यता में चार चांद लगाते हैं। गौरतलब है कि यह सड़क रोम का मुख्य मार्ग है।
कैपिटोलाइन
यह अद्वितीय इमारत 'कैपिटोलाइन हिल' पर बनी है और काफी उंचाई पर स्थित है। इस पर चढ़ने की सीढ़ियों को मशहूर मूर्तिकार माइकल एंजलो ने 1536 में बनाया था। कैपिटोलाइन के सामने घोड़े पर सवार सम्राट मार्कस ओरेलिअस की पीतल की मूर्ति है, जिन्होंने 160-180 ई. तक रोम पर शासन किया था। यह भव्य मूर्ति आपको आश्चर्यचकित कर देगी। इसके अलावा, कैपिटोलाइन पर बना टॉवर भी इस इमारत की अलग पहचान
है। 'कैपिटोलाइन कॉम्प्लेक्स' में एक चर्च, म्यूजियम और पुराना मंदिर भी बना हुआ है।
कॉलोसियम
रोम का प्रतीक है कॉलोसियम। इस विशाल अखाड़े का निर्माण 80 ईस्वी में हुआ था और यहां 50 हजार दर्शक एक साथ बैठ सकते थे। कॉलोसियम में ग्लैडिएटर यानी तलवारबाज अपने करतब दिखाते थे। ये आपस में ही नहीं, बल्कि जंगली जानवरों से भी मुकाबला करते थे। दिल दहला देने वाली ये लड़ाइयां ,चाहें दूसरे तलवारियों से हो या जानवरों से, तब तक जारी रहती थीं, जब तक कि लड़नेवाले में से एक की मौत न हो जाए। हालांकि अब इस अखाड़े के भी अवशेष ही बाकी हैं, लेकिन अतीत की कहानियां ये बखूबी सुनाते हैं। बेशक यहां जाने के बाद तलवारों की खनक और जानवरों की दहाड़ को आप पूरे माहौल में महसूस कर सकेंगे।
फोरम रोमैनम
प्राचीन रोम में बहुत सारे 'फोरम' हुआ करते थे। बताते चलें कि मिलने-जुलने की जगहों को रोम में फोरम कहा जाता है। यहीं शहर की तमाम सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनैतिक वगैरह गतिविधियां हुआ करती थीं। इनमें सबसे ज्यादा मशहूर फोरम रोमैनम था और इस जगह पर आज भी राजभवन, मंदिरों और स्तंभों के अवशेष मौजूद हैं। बेशक इन्हें देखकर प्राचीन रोम की भव्यता का अंदाजा बखूबी हो जाता है।
पैंथियॉन
यह अद्भुत प्राचीन मन्दिर 27 ईसा पूर्व में बना था। इसके विशाल गुंबज के मध्य में 30 फुट का खुला स्थान है। इस जगह की वजह से भक्तों को ऐसा महसूस होता था, मानों उनकी प्रार्थनाएं सीधे देवताओं तक पहुंच रही हैं। मंदिर के अंदर चारों ओर देवी-देवताओं की मूतिर्यों बनी हुई हैं। वैसे, 601 ईस्वी में इस मंदिर को चर्च बना दिया गया था।
विला बोर्गीस
वैसे तो रोम में बहुत सारे बाग-बगीचे हैं, लेकिन विला बोर्गीस बेमिसाल है। इसलिए रोम जाने पर इसे देखना नहीं भूलें। यहां बने म्यूजियम में भी जरूर जाएं, क्योंकि इसे मिस करने पर आप बेहतरीन मूर्तिकला से रूबरू होने का मौका गवां देंगे। यहां निर्मित मूर्तियां अद्वितीय हैं और इतीन सजीव लगती हैं कि मानो अभी बोल पड़ेंगी। यहां नेपोलियन प्रथम की बहन पॉलिन, जिनका विवाह बोर्गीस राजपरिवार में हुआ था, की पलंग पर लेटी हुई एक मूर्ति इतनी सजीव लगती है कि आप कुछ पल इसे एकटक देखे बिना रह नहीं पाएंगे।
त्रेवी फांउंटेन
रोम के खास आर्कषण इसके फाउंटेंस हैं। यहां लगभग 300 इमारतें ऐसी हैं, जिनमें शानदार फव्वारे बने हुए हैं। यहां का सबसे प्रसिद्ध फव्वारा है 'त्रेवी फांउंटेन'। ऐसी मान्यता है कि अगर रोम में कोई दोबारा आना चाहे, तो उसे इस मनोकामना के साथ एक सिक्का फव्वारे में डालना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से यह ख्वाहिश जरूर पूरी होती है।
वैटिकन सिटी
इस प्राचीन नगरी की यात्रा तब तक पूरी नहीं होगी, जब तक कि आप 'वैटिकन सिटी' न देख लें। छठी शताब्दी से यह स्थल रोमन कैथोलिक धर्म के अनुयायियों के सर्वोच्च धार्मिक प्रमुख 'पोप' का निवास स्थान रहा है। हालांकि यह रोम ही में है, लेकिन 1926 से इसे एक स्वतंत्र शहर का दर्जा दे दिया गया था। वैटिकन सिटी का मशहूर सेंट पीटर चर्च,
सेंट पीटर स्क्वेयर, फव्वारे, संग्रहालय वगैरह जरूर देखें। बेशक ये आपको एक अलग ही दुनिया का नजारा दिखाएंगे और आपको हमेशा याद रखने वाला अनुभव देंगे।