पतंगों की रंगीली दुनिया की सैर

अगर आकाश में उड़ती पतंगें आपको लुभाती हैं या फिर आप खुद पतंगबाजी का शौक रखते हैं, तो तमाम काइट्स फेस्टिवल्स आप जैसे शौकीनों के लिए ही हैं। पिछले दिनों अहमदाबाद में एक ऐसा ही फेस्ट हुआ, जहां देश-विदेश के पतंगबाज अनूठी पतंगों के साथ जुटे :

अगर आप वाकई पतंगों की दुनिया में रुचि रखते हैं, तो आप देश-विदेश के काइट्स फेस्टिवल्स के बारे में जरूर जानते होंगे। पिछले दिनों एक ऐसा ही फेस्टिवल आयोजित हुआ, अहमदाबाद में। यह इवेंट 'वाइब्रेंट गुजरात' का एक अहम हिस्सा है। 9 से 12 जनवरी तक चले इस इंटरनैशनल काइट्स फेस्टिवल में पतंगों के नायाब नजारे दिखे।

नर्मदा के किनारे एक खुले मैदान में स्पेन, इटली, वियतनाम, मलयेशिया, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, यूके, चीन समेत लगभग 40 देशों के पतंगबाज अपना कमाल दिखाने जुटे थे, तो देश के भी 11 राज्यों की टीमें यहां हिस्सा लेने आईं। 


इन टीमों में से कई तो पिछले 40 सालों से भी ज्यादा समय से काइट्स फेस्टिवल्स में पतंगों की पेंच लड़ाते आ रहे हैं। और बात सिर्फ पतंगों को उड़ाने की नहीं है, बल्कि इनके ऐसे-ऐसे अंदाज पेश करने की भी है, जिसके बारे में लोग आमतौर पर सोच भी नहीं पाते। तभी तो इस फेस्ट में सादी पतंगों का कोई स्कोप नहीं होता। यहां बात होती है 40 मीटर लंबी पतंग की या फिर 635 स्क्वेयर मीटर की पतंग की, जिसके नीचे कई लोग एक साथ खड़े हो जाएं।

बताते चलें कि फेस्ट में लुक्स, साइज, मेसेज और डिजाइंस के बेस पर इंडियन और फॉरेन कैटिगरी में अवॉर्ड्स भी दिए जाते हैं। हालांकि इन पतंगों को उड़ाना कोई आसान काम नहीं है। नायलॉन की बनी ये पतंगें हैवी होती हैं, तो पतंगबाजों को मौसम की मार भी झेलनी पड़ती है। और हाथ में मांझे से जो जख्म होते हैं, वह अलग।

वैसे, टूरिस्ट्स के लिए ऐसे फेस्ट का एक बड़ा अट्रैक्शन यह होता है कि इसके बहाने उन्हें तमाम देशों के कल्चर को जानने का मौका मिलता है। फिर इसका उपयोग ड्रग्स, ग्लोबल वॉर्मिंग, टेररिज्म जैसे गंभीर मुद्दों पर दुनिया का ध्यान खींचने के लिए भी किया जाता है।

वैसे, लोगों में भी इस फेस्ट का खासा क्रेज दिखा। तभी तो छुट्टियों के दिन न होने के बावजूद लोग पतंगबाजों के अद्भुत कारनामों को देखने के लिए बड़ी संख्या में जुटे।

न्यू जीलैंड से आए पीटर 40 साल से पतंगों के बिजनेस में हैं और फिलहाल वह 1000 स्क्वेयर मीटर वाली पतंग बनाने में जुटे हैं। वर्ल्ड रेकॉर्ड के लिए इसे वह 23 फरवरी को कुवैत में लॉन्च करेंगे और उनकी कोशिश अगले उस पतंग को इस फेस्ट में भी लाने की है। वैसे , इस बार वह मरीन क्रिएचर्स पर बेस्ड काइट्स लेकर आए , जिनमें से ऑक्टोपस की शेप वाली पतंग उनकी फेवरिट है।

इंडिया की पतंगबाजी व कल्चर के खास कायल दिखे वियतनाम के आंग। वह कहते हैं , ' हमारे यहां इंडियन कल्चर का बहुत क्रेज है और इस फेस्टिवल के बारे में लोग खासतौर पर जानते हैं। वैसे , इंडिया की ही तरह हम भी हर तरफ शांति चाहते हैं और यही संदेश हम अपनी पतंगों के जरिए दे रहे हैं। '

वैसे , महिलाएं भी इसमें कम रुचि नहीं लेतीं। 23 साल की क्लारा यूके से आई थीं। वह फेस्ट की यंगेस्ट कंटस्टेंट्स में से एक थीं और पतंगबाजी में अपने पापा की विरासत आगे बढ़ा रही हैं। उनके पापा पिछले 10 साल से इस फेस्टिवल में शामिल हो रहे हैं। वहीं इस साल का खूबसूरत हैंडीक्राफ्ट वर्क वाली काइट्स की कैटिगरी में फर्स्ट प्राइज जीता मनीषा कंथालिया ने। फेस्ट में हिस्सा लेने का यह उनका दूसरा मौका था। वह कहती हैं , ' इस बार मैंने अपनी पतंग पर राजस्थान का कोलाज उतारा। धीरे - धीरे मैं इंडिया की हर आर्ट फॉर्म को अपनी पतंगों पर उतारना चाहती हूं। '

पतंगबाजी से पिछले 20 सालों से जुड़े हैं विठ्ठल भाई , जिन्हें इस काम के लिए प्रधानमंत्री अवॉर्ड भी मिल चुका है। वह कहते हैं , ' पतंगबाजी आसान खेल नहीं है। मौसम में कभी ठंड होती है , तो कभी तेज धूप परेशान करती है। फिर डोर से हाथ भी अक्सर कट जाता है। लेकिन लोग जब जोश दिलाते हैं , तो ये बातें बिल्कुल परेशान नहीं करतीं। '

बेशक , ये तमाम लोगों के जोश का ही कमाल है कि पतंगें बच्चों के खेल से हटकर अब इंटरनैशनल गेम व करोड़ों की इंडस्ट्री बन चुकी हैं और इसी के साथ यह टूरिजम को भी खासा सपोर्ट दे रही है।