काफी कुछ है 'कॉफी लैंड' में...



करने में प्रॉब्लम नहीं होती, तो बेशक कर्नाटक की कोडागु डिस्ट्रिक का कुर्ग आपके लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन साबित होगा। हल्के कोहरे से ढकी पहाड़ियां, ठंडी हवा और कॉफी के बागान, कुल मिलाकर आपको किसी दूसरी दुनिया में होने का अहसास देंगे। वैसे, इसी खूबसूरती के चलते इसे 'इंडिया का स्कॉटलैंड' भी कहते हैं, तो कॉफी प्लांटेशन बहुत होने की वजह से यह 'कॉफी लैंड' के नाम से भी फेमस है। इन सब चीजों को मिलाकर देखा जाए, तो यह पर्यटकों के लिए एक कंप्लीट डेस्टीनेशन है।

ट्रेकिंग ट्रैक 

कुर्ग उर्फ कोडागु का मतलब है पहाड़ी पर घने जंगल। वैसे, कुर्ग का एक नाम मडिकेरी भी है। जैसा कि नाम से जाहिर है, यहां टे्रकिंग के कई दिलचस्प रूट हैं। इसका मजा लेने के लिए बेस्ट सीजन अक्टूबर से फरवरी के बीच है। वैसे, ब्रह्मगिरी हिल्स में काफी अच्छे ट्रेक्स हैं। यहां से आप इरुपा फॉल्स भी पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, आप पुष्पागिरी के रूट्स भी फॉलो कर सकते हैं। 

वाइट वॉटर राफ्टिंग 
कुर्ग के आसपास के कुछ कैंप कावेरी नदी में राफ्टिंग की सुविधा भी देते हैं। अगर कुछ फास्ट ऐक्शन चाहते हैं, तो कुर्ग के दक्षिण में ब्रह्मगिरी में बारापोल नदी के ऊपरी हिस्से में इसे एंजॉय कर सकते हैं। इसका बेस्ट टाइम मिड जून से मिड सितंबर है।

एंगलिंग 
वालानूर कावेरी नदी का बैकवॉटर है और यह जगह फिशिंग के लिए बेस्ट है। अगर आप इसे इंजॉय करना चाहते हैं, तो अपना टूर अक्टूबर से मई के बीच में प्लान करें।

एलिफेंट कैंप 
हाथियों को पानी में मस्ती करते करीब से देखना चाहते हैं, तो कुर्ग के दुबारे एलिफेंट कैंप जरूर जाएं। हाथियों को करीब से देखने के लिए टूरिस्ट मडिकेरी के इन कैंपों में लंबी कतार लगाए रहते हैं। इसके अलावा, यहां हाथी की सवारी, उन्हें खाना खिलाना वगैरह भी इंजॉय कर सकते हैं। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यहां कुशल महावत हैं। अगर यहां नेचर के करीब समय बिताना चाहते हैं, तो इसके लिए यहां कुछ कॉटेज भी हैं।

वॉटर फॉल 
इस कॉफी लैंड के पास ही दो वॉटरफॉल्स भी हैं जो पर्यटकों में काफी पॉपुलर हैं। मडिकेरी से किमी दूर एबीफॉल्स हैं। यहां कॉफी व मसाले खूब होते हैं। मडिकेरी से तकरीबन 90 किमी दूर इरुपु फॉल है जो एक तीर्थस्थल भी है। इसके पास शिव का एक मंदिर है। यहां का आध्यात्मिक व शांत माहौल आपको एक कभी न भूलनेवाला अनुभव देगा। 

कोडावा हॉकी फेस्टिवल 
जहां पूरे देश में क्रिकेट का जबर्दस्त क्रेज है वहीं कुछ छोटे शहरों में हॉकी अभी तक पॉपुलर है। दिलचस्प बातयह है कि कुर्ग भी इन्हीं में से एक है और कम ही लोग जानते हैं कि यह कॉफी लैंड इंडियन हॉकी की नर्सरी कीतरह है। कोडागु के बड़े हॉकी ग्राउंड में प्लेयर्स को ट्रेनिंग दी जाती है। वैसे , 1997 से यहां लगातार हॉकीफेस्टिवल भी हो रहा है जिसमें कई टीमें हिस्सा लेती हैं। 

इनसे जानें कल्चर 
कुर्ग में कई दिलचस्प फेस्टिवल मनाए जाते हैं। यहां के कल्चर को करीब से जानने के लिए आप अपना टूर इनकेअनुसार सेट कर सकते हैं। हथियारों का त्योहार यानी केल्पोल्डू जून से सितंबर के बीच आता है। इस दौरानइन्हें निकालकर इनकी सफाई की जाती है और फिर इनकी विधिवत पूजा होती है। कॉवेरी शंकरमन त्योहारअक्टूबर में आता है। फसल की कटाई के दौरान यहां पुथर मनाया जाता है। यह नवंबर या दिसंबर में आता है।इस दौरान मंदिरों में लोक कलाओं का प्रदर्शन भी होता है। 

ये भी देखें 

मडिकेरी फोर्ट इसे 17 वीं शताब्दी के अंत में मद्दुराजा ने बनवाया था और इसका पुनर्निर्माण टीपू सुल्तान केराज में हुआ था। इस पर कुछ समय तक अंग्रेजों का भी राज रहा। इसके नॉर्थ ईस्ट कॉर्नर में हाथी की दो बड़ीमूर्तियां हैं तो साउथ ईस्ट कॉर्नर में एक चर्च है। 

राजा की गद्दी यह एक छोटी व चौकोर इमारत है जहां यहां के राजा अपने मनोरंजन के लिए आते हैं। इसकेआपस के नजारे बेहद मोहक हैं। बच्चे यहां टॉय ट्रेन की सवारी एंजॉय कर सकते हैं तो फोटोग्राफी के लिए यहबेस्ट साइट्स में से एक है। 

तालकावेरी यहां से कावेरी नदी निकलती है। हालांकि बारिश के मौसम के अलावा यहां पानी का खास बहावनजर नहीं आता। यहां भगवान अगाधीश्वर का एक छोटा सा मंदिर है जिसके प्रति स्थानीय लोगों की गहरीआस्था है। 

ओंकारेश्वर मंदिर यह मडिकेरी से महज एक किमी दूर है और यह मंदिर इस्लाम व गॉथिक आर्किटेक्चर केमेल का बेहतरीन नमूना है। मंदिर की दीवारें खूबसूरत पेंटिंग्स से सजी हैं। कहा जाता है कि यहां जिस शिवलिंगकी पूजा होती है उसे वाराणसी से लाया गया था। 

इगुथप्पा मंदिर यह मंदिर केरल के पुराने आर्किटेक्चर को सहेजे है और फसल की कटाई के समय यहां विशेषपूजा होती है। हर साल मार्च के महीने में यहां खास त्योहार मनाया जाता है और इसमें शामिल होने के लिए दूरदूर से लोग आते हैं। 

कैसे जाएं 
अगर एयर ट्रैवल करना चाहते हैं तो कुर्ग का करीबी एयरपोर्ट मैंगलोर है। दोनों जगहों की दूरी लगभग 135किमी है। आप बैंगलुरु की फ्लाइट भी ले सकते हैं। यहां से कुर्ग 260 किमी दूर है। अगर ट्रेन से जाना चाहते हैं ,तो मैसूर रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक पड़ेगा। रोड से जाना चाहते हैं तो मैसूर सबसे पास है। यहां से कुर्ग 120किमी है। 

कब जाएं :
कुर्ग जाने के लिए अप्रैल से नवंबर का समय बेस्ट है। 

कहां ठहरें :
यहां आपको ठहरने के लिए काफी ऑप्शंस मिलेंगे। वैसे आप यहां होम स्टे का ऑप्शन भी चुन सकते हैं। 

क्या खरीदें :
अगर यहां से शॉपिंग करने के मूड में हों तो कॉफी शहद मसाले इलायची काली मिर्च पाइनएपल ,पापड़ और संतरे खरीद कर ले जा सकते हैं। वैसे कुर्ग के सिल्क की साडि़यां भी काफी मशहूर हैं।