ट्रेन का नाम सुनते ही जेहन में किसी लंबे सफर की खूबसूरत यादें ताजा हो उठती हैं। वक्त के साथ रेलगाड़ी के सफर में भी कई बड़े बदलाव आए हैं। यह सच है कि रेल के ईजाद होने से लेकर अब तक उसकी रफ्तार बहुत बढ़ चुकी है, लेकिन लग्जरी के मामले में पहले की ट्रेनें भी कुछ कम नहीं थीं। नैशनल रेल म्यूजियम में आप आजादी से पहले के महाराजाओं के पर्सनल कोच और रेलवे की शुरुआत से लेकर उसके अब तक के शानदार सफर को देख सकते हैं।
सिंगल ट्रैक पर चलने वाली ट्रेन
क्या आपने कभी किसी ट्रेन को सिंगल ट्रैक पर चलते देखा है? अगर नहीं, तो आप यहां देख सकते हैं। पटियाला के महाराजा की इस ट्रेन का एक हिस्सा पटरी पर और दूसरा सड़क पर चलता है। इसका ज्यादातर वजन पटरी पर चलने वाले पहिए पर ही रहता है, जबकि दूसरा पहिया गाड़ी को संतुलित रखता है। खास बात यह है कि दुनिया में कहीं और सिंगल ट्रैक पर चलने वाली ट्रेनें नहीं बची हैं। कुछ वक्त पहले तक यह ट्रेन चलती थी, जो आजकल बंद है। इसके अलावा, आप प्रिंस ऑफ वेल्स का सलून, मैसूर के महाराजा का सलून, बड़ौदा के महाराजा का सलून, वाइसरीगल डाइनिंग कार जैसे कई लग्जरी कोच यहां देख सकते हैं। महाराजा के सलून का इंटीरियर देखने के लिए अलग से 50 रुपये का टिकट खरीदना होगा।
ट्रेनों की दादी
यूं तो यहां के ओपन स्पेस में पुराने जमाने के कई लाजवाब कोच देखे जा सकते हैं। लेकिन इनमें भी सबसे खास है, 1855 में बनी ट्रेन 'फेयरी क्वीन'। यह दुनिया के सबसे पुराने स्टीम इंजनों में है और इसे ट्रेनों की दादी भी कहा जाता है।
जॉय ट्रेन
म्यूजियम की सबसे खास चीज है जॉय ट्रेन, जो बच्चों को बेहद पसंद आती है। यकीन मानिए, इसमें सफर करने के बाद आप भी इसके दीवाने हो जाएंगे। पूरे म्यूजियम में आपको घुमाती यह ट्रेन कई खूबसूरत नजारों से भी रूबरू कराती है। हां, इसके लिए अलग से टिकट खरीदना पड़ेगा, जिसकी कीमत बड़ों के लिए 10 रुपये और बच्चों के लिए 5 रुपये है। वीकएंड पर इस जॉय ट्रेन की राइड के लिए थोड़ा वेट करना पड़ सकता है।
रेलवे की धरोहर
इस गैलरी में आप रेल के टेक्निकल पार्ट को समझ सकते हैं। इसके सिग्नल सिस्टम, अलग-अलग पार्ट्स के अलावा भारतीय रेल की उपलब्धियों की झलक भी देख सकते हैं। इस गैलरी की सबसे खास है ब्लाइंड बच्चों के लिए एक कॉर्नर 'आकांक्षा'। नेत्रहीन बच्चे इस कॉर्नर में रखी चीजों को छूकर पहचान सकते हैं।
टाइमिंग
अप्रैल से सितंबर: सुबह 9:30 से शाम 7:30 बजे तक
अक्टूबर से मार्च: सुबह 9:30 से शाम 5:30 बजे तक
टिकट: बड़ों के लिए 10 रुपये, 3-12 साल के बच्चों के लिए 3 रुपये
सिंगल ट्रैक पर चलने वाली ट्रेन
क्या आपने कभी किसी ट्रेन को सिंगल ट्रैक पर चलते देखा है? अगर नहीं, तो आप यहां देख सकते हैं। पटियाला के महाराजा की इस ट्रेन का एक हिस्सा पटरी पर और दूसरा सड़क पर चलता है। इसका ज्यादातर वजन पटरी पर चलने वाले पहिए पर ही रहता है, जबकि दूसरा पहिया गाड़ी को संतुलित रखता है। खास बात यह है कि दुनिया में कहीं और सिंगल ट्रैक पर चलने वाली ट्रेनें नहीं बची हैं। कुछ वक्त पहले तक यह ट्रेन चलती थी, जो आजकल बंद है। इसके अलावा, आप प्रिंस ऑफ वेल्स का सलून, मैसूर के महाराजा का सलून, बड़ौदा के महाराजा का सलून, वाइसरीगल डाइनिंग कार जैसे कई लग्जरी कोच यहां देख सकते हैं। महाराजा के सलून का इंटीरियर देखने के लिए अलग से 50 रुपये का टिकट खरीदना होगा।
ट्रेनों की दादी
यूं तो यहां के ओपन स्पेस में पुराने जमाने के कई लाजवाब कोच देखे जा सकते हैं। लेकिन इनमें भी सबसे खास है, 1855 में बनी ट्रेन 'फेयरी क्वीन'। यह दुनिया के सबसे पुराने स्टीम इंजनों में है और इसे ट्रेनों की दादी भी कहा जाता है।
जॉय ट्रेन
म्यूजियम की सबसे खास चीज है जॉय ट्रेन, जो बच्चों को बेहद पसंद आती है। यकीन मानिए, इसमें सफर करने के बाद आप भी इसके दीवाने हो जाएंगे। पूरे म्यूजियम में आपको घुमाती यह ट्रेन कई खूबसूरत नजारों से भी रूबरू कराती है। हां, इसके लिए अलग से टिकट खरीदना पड़ेगा, जिसकी कीमत बड़ों के लिए 10 रुपये और बच्चों के लिए 5 रुपये है। वीकएंड पर इस जॉय ट्रेन की राइड के लिए थोड़ा वेट करना पड़ सकता है।
रेलवे की धरोहर
इस गैलरी में आप रेल के टेक्निकल पार्ट को समझ सकते हैं। इसके सिग्नल सिस्टम, अलग-अलग पार्ट्स के अलावा भारतीय रेल की उपलब्धियों की झलक भी देख सकते हैं। इस गैलरी की सबसे खास है ब्लाइंड बच्चों के लिए एक कॉर्नर 'आकांक्षा'। नेत्रहीन बच्चे इस कॉर्नर में रखी चीजों को छूकर पहचान सकते हैं।
टाइमिंग
अप्रैल से सितंबर: सुबह 9:30 से शाम 7:30 बजे तक
अक्टूबर से मार्च: सुबह 9:30 से शाम 5:30 बजे तक
टिकट: बड़ों के लिए 10 रुपये, 3-12 साल के बच्चों के लिए 3 रुपये