दिल्ली ने एक
लंबा इतिहास देखा है। वक्त के साथ इसकी कुछ धरोहरों में लोगों के खास
दिलचस्पी दिखाई, तो कुछ को लोग भूल ही गए। शीशमहल भी ऐसी ही एक धरोहर है,
जिसके लिए माना जाता है कि यहां औरंगजेब की ताजपोशी हुई थी, लेकिन लोग इसे
कम ही जानते हैं :
लाहौर का 'शालीमार गार्डन' और कश्मीर का 'रॉयल गार्डन', इनका मेल आपको उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में दिखेगा। यहां के सी-डी ब्लॉक के पार्क में एक ऐतिहासिक धरोहर मौजूद है। लगभग 4 किलोमीटर में फैले इस गार्डन के बीचोबीच है 17वीं शताब्दी की एक इमारत। दरअसल, यह सफेद व लाल पत्थरों व ईंटों से बना एक महल है, जहां मुगल शासक शाहजहां के बेटे औरंगजेब की की ताजपोशी हुई थी। बताया जाता है कि यह ऐतिहासिक इमारत 350 साल पुरानी है और इसका एक हिस्सा आज भी मौजूद है। वैसे, इसी जगह पर पंजाब के महाराजा रंजीत सिंह को कैद करके रखा गया था। मगल शासकों का अस्तित्व समाप्त होने के बाद दिल्ली में ब्रिटिश सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर सर डेविड ऑचर्लोनी (Sir David Ochterlony) रहा करते थे।
वक्त बीतने के साथ-साथ महल की चमक भी जाती रही। बहुत कुछ बदलाव आया। महल के एक बड़े हिस्से का अस्तित्व मिट गया है, लेकिन ऐसी कई इमारतें और उससे जुड़ी चीजें आज भी मौजूद हैं। ये चीजें मुगल इतिहास को बखूबी बयान करते हैं।
सभी के लिए खास
रिसर्च से जुड़े कई स्टूडेंट्स वहां आते हैं। इक्का दुक्क देशी-विदेशी टूरिस्ट भी आते हैं। गार्डन के भीतर कुछ दूर जाने पर शहर का शोरशराबा आमतौर पर पता नहीं चलता। सुबह के समय बिल्कुल शांत माहौल होता है। ऐसा लगता है मानों वह दिल्ली का हिस्सा ही नहीं है। वैसे तो, सुबह के समय आसपास के सैकड़ों लोग नियमित तौर पर सैर के लिए आते हैं, लेकिन इसके बाद आसपास के लोगों के आने का सिलसिला शाम तक लगा रहता है। कोई आराम करता मिल जाएगा, तो कोई बच्चों के साथ पिकनिक मनाने में मशगूल।
गार्डन की बाउंड्री कई जगहों से टूटी हुई है। पैदल चलने वालों के लिए गार्डन के बीचोबीच कई रास्ते हैं, जो हैदर पुर और पीतमपुरा इलाके को जोड़ते हैं। इन रास्तों को गार्डन की बाउंड्री टूटने के बाद लोगों ने खुदबखुद बना लिया है। बुजुर्ग भी इस गार्डन में खूब एंजॉय करते हैं। कहीं ताश का मजमा लग हुआ मिलेगा, तो कहीं राजनीति पर गर्मागरम बहस सुनाई देगी।
बात वापस शीश महल की करें, तो इसका निर्माण मुगल शासक शाहजहां ने 1653 में करवाया था। 31 जुलाई 1658 को औरंगजेब ने यहीं अपना राज्यभिषेक करवाया। कश्मीर, पंजाब और लाहौर की यात्रा के दौरान मुगल शासक यहां अक्सर ठहरा करते है। इसके बाद गर्मी के दिनों अंग्रेज शासक इसी महल में ठहरा करते थे। महल के साथ तालाब, फाउंटेन और 'दीवान ए आम' और 'दीवान ए खास' का अस्तित्व आज भी मौजूद है। लगभग डेढ़ मीटर गोलाकार 25 फाउंटेन का अस्तित्व साफ दिखाई देता है। महल के साथ उस जमाने का एक कुआं भी है। हालांकि अब उसमें पानी नहीं है और चबूतरे भी काफी हद तक टूट चुके हैं। महल से सटा हाथी खाना है, जो लाल ईंटों से बना है।
कैसे मिले पहचान
मुगल कालीन इस ऐतिहासिक इमारत की देखभाल का काम भारत सरकार के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के जिम्मे है, जबकि गार्ड की मेंटनेंस दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के पास। पार्क का एक हिस्सा बेहद खूबसूरत है, लेकिन बाकी हिस्सा थोड़ा वीरान।
गार्डन से सटा शालामार गांव है। यहां के 75 वर्षीय निवासी हरि राम सैनी कहते हैं, 'सरकार यदि इस ऐतिहासिक स्थल पर ध्यान दे, तो जल्दी ही यह गार्डन दिल्ली के बड़े पिकनिक स्पॉट शामिल हो सकता है। हालांकि इसकी कोशिश तो होती है, लेकिन अंजाम कुछ नहीं निकलता। समझ में नहीं आता कि आखिर किस वजह से काम बीच में ही छोड़ दिया जाता है।'
इसी इलाके के निवासी राजू चौहान का कहना है कि वैसे तो ऐतिहासिक महल तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन अच्छा रास्ता, बेहतर साधन और गार्डन व महल से जुड़ी इतिहास की जानकारी वहां उपलब्ध करवाई जाए, तो यह एक अच्छा टूरिस्ट स्पॉट बन सकता है। राजू कहते हैं, 'मेट्रो स्टेशन से करीब होने के कारण टूरिस्टों के लिए यह एक बेहतर स्पॉट बन सकता है, जरूरत इस बात की है कि इस बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी दी जाए। मेट्रो स्टेशनों पर इसके बारे में जानकारी मुहैया करवाई जाए, क्योंकि इसी वजह से यह इतने सालों से गुमनाम है।'
कैसे पहुंचें
शीशमहल तक पहुंचने के लिए कई तरीके हैं। अपनी गाड़ी के अलावा ट्रेन, मेट्रो और बस से भी आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। मेट्रो से जाने के लिए जहांगीरपुरी या फिर आदर्श नगर मेट्रो स्टेशन नजदीक है। सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन से भी आया जा सकता है। ट्रेन से जाने के लिए आजादपुर रेलवे स्टेशन नजदीक है। कनॉट प्लेस, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और कश्मीरी आईएसबीटी से बस भी जाया जा सकता है।
यह जीटी रोड पर न्यू फ्रूट मंडी, आजादपुर इलाके में स्थित है। आने वाले समय में यहां पहुंचना और आसान हो जाएगा, क्योंकि जीटी रोड व शालीमारबाग को जोड़ने वाली सड़क पर रेलवे का अंडर पास बनाया जा रहा है, जो अगले तीन महीने में तैयार हो सकता है।
कब जाएं
गार्डन और शीश महल में सुबह 6 बजे से शाम पांच बजे के दौरान जाना ठीक रहेगा। शाम ढलने के बाद गार्डन में जाना ठीक नहीं रहेगा, क्योंकि यहां लाइट की अच्छी व्यवस्था नहीं है।
लाहौर का 'शालीमार गार्डन' और कश्मीर का 'रॉयल गार्डन', इनका मेल आपको उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में दिखेगा। यहां के सी-डी ब्लॉक के पार्क में एक ऐतिहासिक धरोहर मौजूद है। लगभग 4 किलोमीटर में फैले इस गार्डन के बीचोबीच है 17वीं शताब्दी की एक इमारत। दरअसल, यह सफेद व लाल पत्थरों व ईंटों से बना एक महल है, जहां मुगल शासक शाहजहां के बेटे औरंगजेब की की ताजपोशी हुई थी। बताया जाता है कि यह ऐतिहासिक इमारत 350 साल पुरानी है और इसका एक हिस्सा आज भी मौजूद है। वैसे, इसी जगह पर पंजाब के महाराजा रंजीत सिंह को कैद करके रखा गया था। मगल शासकों का अस्तित्व समाप्त होने के बाद दिल्ली में ब्रिटिश सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर सर डेविड ऑचर्लोनी (Sir David Ochterlony) रहा करते थे।
वक्त बीतने के साथ-साथ महल की चमक भी जाती रही। बहुत कुछ बदलाव आया। महल के एक बड़े हिस्से का अस्तित्व मिट गया है, लेकिन ऐसी कई इमारतें और उससे जुड़ी चीजें आज भी मौजूद हैं। ये चीजें मुगल इतिहास को बखूबी बयान करते हैं।
सभी के लिए खास
रिसर्च से जुड़े कई स्टूडेंट्स वहां आते हैं। इक्का दुक्क देशी-विदेशी टूरिस्ट भी आते हैं। गार्डन के भीतर कुछ दूर जाने पर शहर का शोरशराबा आमतौर पर पता नहीं चलता। सुबह के समय बिल्कुल शांत माहौल होता है। ऐसा लगता है मानों वह दिल्ली का हिस्सा ही नहीं है। वैसे तो, सुबह के समय आसपास के सैकड़ों लोग नियमित तौर पर सैर के लिए आते हैं, लेकिन इसके बाद आसपास के लोगों के आने का सिलसिला शाम तक लगा रहता है। कोई आराम करता मिल जाएगा, तो कोई बच्चों के साथ पिकनिक मनाने में मशगूल।
गार्डन की बाउंड्री कई जगहों से टूटी हुई है। पैदल चलने वालों के लिए गार्डन के बीचोबीच कई रास्ते हैं, जो हैदर पुर और पीतमपुरा इलाके को जोड़ते हैं। इन रास्तों को गार्डन की बाउंड्री टूटने के बाद लोगों ने खुदबखुद बना लिया है। बुजुर्ग भी इस गार्डन में खूब एंजॉय करते हैं। कहीं ताश का मजमा लग हुआ मिलेगा, तो कहीं राजनीति पर गर्मागरम बहस सुनाई देगी।
बात वापस शीश महल की करें, तो इसका निर्माण मुगल शासक शाहजहां ने 1653 में करवाया था। 31 जुलाई 1658 को औरंगजेब ने यहीं अपना राज्यभिषेक करवाया। कश्मीर, पंजाब और लाहौर की यात्रा के दौरान मुगल शासक यहां अक्सर ठहरा करते है। इसके बाद गर्मी के दिनों अंग्रेज शासक इसी महल में ठहरा करते थे। महल के साथ तालाब, फाउंटेन और 'दीवान ए आम' और 'दीवान ए खास' का अस्तित्व आज भी मौजूद है। लगभग डेढ़ मीटर गोलाकार 25 फाउंटेन का अस्तित्व साफ दिखाई देता है। महल के साथ उस जमाने का एक कुआं भी है। हालांकि अब उसमें पानी नहीं है और चबूतरे भी काफी हद तक टूट चुके हैं। महल से सटा हाथी खाना है, जो लाल ईंटों से बना है।
कैसे मिले पहचान
मुगल कालीन इस ऐतिहासिक इमारत की देखभाल का काम भारत सरकार के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के जिम्मे है, जबकि गार्ड की मेंटनेंस दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के पास। पार्क का एक हिस्सा बेहद खूबसूरत है, लेकिन बाकी हिस्सा थोड़ा वीरान।
गार्डन से सटा शालामार गांव है। यहां के 75 वर्षीय निवासी हरि राम सैनी कहते हैं, 'सरकार यदि इस ऐतिहासिक स्थल पर ध्यान दे, तो जल्दी ही यह गार्डन दिल्ली के बड़े पिकनिक स्पॉट शामिल हो सकता है। हालांकि इसकी कोशिश तो होती है, लेकिन अंजाम कुछ नहीं निकलता। समझ में नहीं आता कि आखिर किस वजह से काम बीच में ही छोड़ दिया जाता है।'
इसी इलाके के निवासी राजू चौहान का कहना है कि वैसे तो ऐतिहासिक महल तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन अच्छा रास्ता, बेहतर साधन और गार्डन व महल से जुड़ी इतिहास की जानकारी वहां उपलब्ध करवाई जाए, तो यह एक अच्छा टूरिस्ट स्पॉट बन सकता है। राजू कहते हैं, 'मेट्रो स्टेशन से करीब होने के कारण टूरिस्टों के लिए यह एक बेहतर स्पॉट बन सकता है, जरूरत इस बात की है कि इस बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी दी जाए। मेट्रो स्टेशनों पर इसके बारे में जानकारी मुहैया करवाई जाए, क्योंकि इसी वजह से यह इतने सालों से गुमनाम है।'
कैसे पहुंचें
शीशमहल तक पहुंचने के लिए कई तरीके हैं। अपनी गाड़ी के अलावा ट्रेन, मेट्रो और बस से भी आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। मेट्रो से जाने के लिए जहांगीरपुरी या फिर आदर्श नगर मेट्रो स्टेशन नजदीक है। सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन से भी आया जा सकता है। ट्रेन से जाने के लिए आजादपुर रेलवे स्टेशन नजदीक है। कनॉट प्लेस, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और कश्मीरी आईएसबीटी से बस भी जाया जा सकता है।
यह जीटी रोड पर न्यू फ्रूट मंडी, आजादपुर इलाके में स्थित है। आने वाले समय में यहां पहुंचना और आसान हो जाएगा, क्योंकि जीटी रोड व शालीमारबाग को जोड़ने वाली सड़क पर रेलवे का अंडर पास बनाया जा रहा है, जो अगले तीन महीने में तैयार हो सकता है।
कब जाएं
गार्डन और शीश महल में सुबह 6 बजे से शाम पांच बजे के दौरान जाना ठीक रहेगा। शाम ढलने के बाद गार्डन में जाना ठीक नहीं रहेगा, क्योंकि यहां लाइट की अच्छी व्यवस्था नहीं है।