एयर ट्रैवल से हो सकती है परेशानी


एयर ट्रैवलिंग भले ही हमें कम समय में हमारी मंजिल तक पहुंचा देती हूं, लेकिन इससे होने वाली परेशानियां सेहत को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं। बात चाहे केबिन लगेज गिरने की हो या फिर पलूशन वाली हवा में सांस लेने की, पैसेंजर्स को इन तकलीफों से दो-चार होना ही पड़ता है और यहीं से शुरू होती है तमाम हेल्थ प्रॉब्लम्स। जानते हैं, एयर ट्रैवलिंग से जुड़ी कुछ कॉमन समस्याओं के बारे में: 

स्टेबिलिटी न होने से प्रॉब्लम 
एयर ट्रैवल के दौरान आप स्टेबल नहीं हो पाते। ऐसे में हड्डियों के टूटने तक की गंभीर चोटें इस ट्रैवलिंग के दौरान आ सकती हैं। यही नहीं, सिर में चोट लगने के चांसेज भी ज्यादा रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया के ट्रांसपोर्ट सेफ्टी ब्यूरो की एक स्टडी के अनुसार हर साल ऐसी चोटों के कई मामले सामने आते हैं। 

सामान का गिरना 
प्लेन में सीटों के ऊपर केबिन बने होते हैं, जहां से कई बार सामान फिसल कर पसेंजर्स के ऊपर गिर जाता है। ऐसे में कट व छोटी चोट आने के अलावा सिर में गंभीर चोट आने तक का खतरा रहता है। 'द डेली टेलिग्राफ' ने यूएस असोसिएशन ऑफ फ्लाइट अटेंडेंट्स-सीडब्ल्यूए इंटरनैशनल के हवाले से कहा है कि भारी कैरी-ऑन आइटम्स के गिरने से प्लेन स्टाफ व पैसेंजर्स के घायल होने की घटनाएं बहुत होती हैं। 

कैंसर लिंक 
कुछ साइंटिस्ट मानते हैं कि एयरपोर्ट पर लगे फुल बॉडी स्कैनर्स के रिस्क को गंभीरता से नहीं लिया जाता और इससे स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के बायोकेमिस्ट डेविड अगार्ड कहते हैं कि दूसरे स्कैनर्स की तुलना में इस डिवाइस से रेडिएशंस लो-एनर्जी बीम लेवल पर निकलती हैं। ये स्किन और इसके नीचे के टिशूज पर ज्यादा असर डालती हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के रेडियॉलजिकल रिसर्च सेंटर के हेड, डेविड ब्रेनर का कहना है कि इस स्कैनर से निकलने वाली रेडिएशंस दूसरे स्कैनर्स की तुलना में 20 गुना में ज्यादा होती हैं। 

विषैली केबिन एयर 
केबिन एयर अगर साफ न हो तो इसकी वजह से आलस सुस्ती ढीलापन सिर दर्द सांस लेने की दिक्कतऔर नर्वस से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। 

कान को नुकसान 
फ्लाइट में एयर प्रेशर में होने वाले बदलाव से कानों में दर्द खून आना या कान के पर्दे के फटने जैसी परेशानियांहो सकती हैं। ये तकलीफ तब ज्यादा होती हैं जब मिडल ईयर के पास एयर प्रेशन आसपास के प्रेशर से या तोबहुत ज्यादा हो जाए या फिर बहुत कम। एरोस्पेस मेडिकल असोसिएशन का कहना है कि अगर आपको किसीतरह की कोई इंफेक्शन या एलर्जी है या फिर कहीं से खून आने की वजह से ब्लॉकेज होती है तो ये परेशानियांकाफी बढ़ सकती हैं। 

जर्म्स अटैक 
एयरपोर्ट भी पूरी तरह साफ नहीं होते इसलिए यहां आते ही आप पर जर्म अटैक का खतरा बढ़ जाता है। 

जुकाम फ्लू होना 
फ्लाइट के दौरान जुकाम व फ्लू की समस्या बहुत रहती है। 2004 में हुई एक स्टडी बताती है कि फ्लाइट केदौरान जुकाम या फ्लू होने के चांसेज 100 प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं। 

ब्लड क्लॉटिंग 
रिसर्च बताते हैं कि एयर पसैंजर्स में वेन थ्रॉम्बॉसिस के केसेज काफी देखने को मिले हैं और हाल ही में अमेरिका मेंहुई एक स्टडी से इसे प्रूव भी किया है। रिसर्च करने वाली टीम ने पाया कि एयर ट्रैवल की वजह से धमनियो मेंखून के थक्के बनने लगते हैं।