अगर कभी पत्थरों के जरिए इतिहास को जानने का मन करे, तो मांडू घूमने की तैयारी कर लें। वैसे, अपने माहौल व खूबसूरती के चलते यह बसने के साथ ही 'खुशियों के शहर' के नाम के साथ इतरा रहा है।
मध्य प्रदेश का मांडू विंध्याचल पहाड़ियों में बसा है। 13वीं शताब्दी के अंत में इसे मालवा के राजा ने बसाकर इसे शदियाबाद यानी खुशियों के शहर का नाम दिया। इसके बाद इस पर राज करने वाले हर शासक ने इसे किसी न किसी खास इमारत का तोहफा दिया। इन खास इमारतों में से कुछ बाज बहादुर और रानी रूपमति की प्रेम कहानी भी पूरे दिल से सुनाती हैं।
क्या देखें
दरवाजे
मांडू लगभग 45 किलोमीटर लंबी दीवारों से घिरा है और इनमें 12 दरवाजे हैं। इनमें मुख्य है दिल्ली दरवाजा, जहां तक पहुंचने के लिए कई और दरवाजों से गुजरना पड़ता है। इसके अलावा, रामपोल दरवाजा, जहांगीर गेट और तारापुर गेट भी देखने लायक हैं।
द रॉयल एनक्लेव
जहाज महल
जहाज की शेप में बना यह महल 120 मीटर लंबा है। खूबसूरत व दो मंजिला यह महल दो आर्टिफिशल लेक्स, मुंज तालाब व कापुर तालाब के बीच में है। कहा जाता है कि इसे सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने अपने हरम के लिए बनवाया था। पेवेलियन, बालकनी और ओपन टैरेस वाला यह महल पत्थर के जरिए राजसी शानो-शौकत दिखाता है। चांदनी रात में इसे पास स्थित तवेली महल से देखना एक यादगार नजारा पेश करता है।
हिंडोला महल
ग्यासुद्दीन के राज के दौरान बने इस महल को इसका नाम स्लोप वाली दीवारों के चलते मिला। वैसे, इसमें आपको उस समय के हिसाब से कई दिलचस्प तकनीकें देखने को मिलेंगी। इसके पश्चिम में और भी कई इमारते हैं, जिन्हें आज पहचान पाना मुश्किल है, लेकिन इनकी तब की शान आज भी देखी जा सकती है। इसके बीच में शानदार चंपा बावड़ी है, जहां पानी को ठंडे व गर्म करने का अरेंजमेंट भी किया गया है।
ये भी देखें
इस एनक्लेव में और भी कई देखने लायक जगहें हैं। इनमें दिलावर खान मस्जिद, नाहर झरोखा, उजली व अंधेरी बावड़िय़ां और घड़ा शाह की दुकान व घर वाकई दिलचस्प हैं।
द सेंट्रल ग्रुप
होशांग शाह का मकबरा
यह मकबरा अफगानी आर्किटेक्चर का यह एक बेहतरीन नमूना है। उस वक्त भी इसकी इतनी चर्चा थी कि इसके गुंबद के स्टाइल और नजाकत भरे संगमरमर के काम को देखने के लिए शाहजहां ने अपने दरबार के चार नामी आर्किटेक्ट भेजे थे। इनमें से एक उस्ताद हामिद था, जो ताज महल का डिजाइन तैयार करने वालों में से एक था।
जामी मस्जिद
हालांकि यह मस्जिद बेहद सादगी से बनाई गई है, लेकिन इसके आर्क, गुंबद, खंभों वगैरह का अरेंजमेंट वाकई दिलचस्प है।
अशर्फी महल
होशांग शाह के परिवार के महमूद खिलजी ने इस 'सोने के सिक्कों के महल' को बनवाया था। जामी मस्जिद के अपोजिट बना यह महल एक मदरसे के तौर पर काम आता था। वैसे, इस महल में एक सात मंजिला टावर भी बना है, जिसे महमूद ने मेवाड़ के राणा खंबा को हराने के बाद बनवाया था। फिलहाल इस टावर की एक ही मंजिल के अवशेष बाकी हैं।
रेवा कुंड ग्रुप
रेवा कुंड
हालांकि इसे बाज बहादुर ने रूपमति के महल को पानी देने के लिए बनवाया था, लेकिन कुछ वजहों से लोगों की इसमें श्रद्धा है।
बाज बहादुर पैलेस
16वीं शताब्दी की शुरुआत में इस पैलेस को बाज बहादुर ने बनवाया था। इसकी खासियत है, इसके खुले गलियारे हैं, जहां से आस-पास का खूबसूरत नजारा बखूबी देखा जा सकता है।
रूपमति पविलियन
पहले इसे सेना को गश्त लगाने के लिए बनवाया गया था। पहाड़ी की चोटी पर बने इसके गलियारे से रानी रूपमति बाज बहादुर के महल और नीचे बहती नर्मदा नदी के नजारों को निहारा करती थी।
इन्हें भी देखें
मांडू में कुछ ऐसे मॉन्युमेंट्स भी हैं, जो किसी कैटिगरी में नहीं आते, लेकिन देखने लायक हैं। इन्हीं में एक है नीलकंठ। पहाड़ी की उंचाई पर बना यह एक पुराना शिव मंदिर है, जहां आज भी लोग पूरी आस्था के साथ जाते हैं। इसी के पास नीलकंठ महल है, जिसे बादशाह अकबर की एक हिंदू पत्नी के लिए बनवाया गया था। यह महल मुगल आर्किटेक्चर का एक बेहतरीन नमूना है। साथ ही, हाथी महल, दरिया खान का मकबरा, दाई का महल, जाली महल जैसी जगहें भी हैं, जो अपने नामों की तरह ही दिलचस्प हैं। इनके अलावा, ईको पॉइंट, लोहानी केव्स, सनसेट पॉइंट वगैरह भी ऐसे टूरिस्ट पॉइंट्स हैं, जहां गए बिना आप मांडू का पूरा मजा नहीं ले पाएंगे।
कैसे जाएं
मांडू से नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर है, जो दिल्ली व भोपाल से जुड़ा है। यहां से मांडू की दूरी 99 किमी है। अगर ट्रेन से जाना चाहते हैं, इंदौर व रतलाम नजदीकी स्टेशन हैं। रतलाम मांडू से 124 किमी दूर है। वैसे, इंदौर, रतलाम, भोपाल वगैरह से मांडू के लिए अच्छी बस सर्विस है।
कब जाएं
मांडू जाने के लिए जुलाई से मार्च के बीच का वक्त बेस्ट है।
कहां ठहरें
मांडू में रुकने के अच्छे ऑप्शंस उपलब्ध हैं। आप चाहें तो इंदौर को भी अपना हॉल्ट बना सकते हैं।
मध्य प्रदेश का मांडू विंध्याचल पहाड़ियों में बसा है। 13वीं शताब्दी के अंत में इसे मालवा के राजा ने बसाकर इसे शदियाबाद यानी खुशियों के शहर का नाम दिया। इसके बाद इस पर राज करने वाले हर शासक ने इसे किसी न किसी खास इमारत का तोहफा दिया। इन खास इमारतों में से कुछ बाज बहादुर और रानी रूपमति की प्रेम कहानी भी पूरे दिल से सुनाती हैं।
क्या देखें
दरवाजे
मांडू लगभग 45 किलोमीटर लंबी दीवारों से घिरा है और इनमें 12 दरवाजे हैं। इनमें मुख्य है दिल्ली दरवाजा, जहां तक पहुंचने के लिए कई और दरवाजों से गुजरना पड़ता है। इसके अलावा, रामपोल दरवाजा, जहांगीर गेट और तारापुर गेट भी देखने लायक हैं।
द रॉयल एनक्लेव
जहाज महल
जहाज की शेप में बना यह महल 120 मीटर लंबा है। खूबसूरत व दो मंजिला यह महल दो आर्टिफिशल लेक्स, मुंज तालाब व कापुर तालाब के बीच में है। कहा जाता है कि इसे सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने अपने हरम के लिए बनवाया था। पेवेलियन, बालकनी और ओपन टैरेस वाला यह महल पत्थर के जरिए राजसी शानो-शौकत दिखाता है। चांदनी रात में इसे पास स्थित तवेली महल से देखना एक यादगार नजारा पेश करता है।
हिंडोला महल
ग्यासुद्दीन के राज के दौरान बने इस महल को इसका नाम स्लोप वाली दीवारों के चलते मिला। वैसे, इसमें आपको उस समय के हिसाब से कई दिलचस्प तकनीकें देखने को मिलेंगी। इसके पश्चिम में और भी कई इमारते हैं, जिन्हें आज पहचान पाना मुश्किल है, लेकिन इनकी तब की शान आज भी देखी जा सकती है। इसके बीच में शानदार चंपा बावड़ी है, जहां पानी को ठंडे व गर्म करने का अरेंजमेंट भी किया गया है।
ये भी देखें
इस एनक्लेव में और भी कई देखने लायक जगहें हैं। इनमें दिलावर खान मस्जिद, नाहर झरोखा, उजली व अंधेरी बावड़िय़ां और घड़ा शाह की दुकान व घर वाकई दिलचस्प हैं।
द सेंट्रल ग्रुप
होशांग शाह का मकबरा
यह मकबरा अफगानी आर्किटेक्चर का यह एक बेहतरीन नमूना है। उस वक्त भी इसकी इतनी चर्चा थी कि इसके गुंबद के स्टाइल और नजाकत भरे संगमरमर के काम को देखने के लिए शाहजहां ने अपने दरबार के चार नामी आर्किटेक्ट भेजे थे। इनमें से एक उस्ताद हामिद था, जो ताज महल का डिजाइन तैयार करने वालों में से एक था।
जामी मस्जिद
हालांकि यह मस्जिद बेहद सादगी से बनाई गई है, लेकिन इसके आर्क, गुंबद, खंभों वगैरह का अरेंजमेंट वाकई दिलचस्प है।
अशर्फी महल
होशांग शाह के परिवार के महमूद खिलजी ने इस 'सोने के सिक्कों के महल' को बनवाया था। जामी मस्जिद के अपोजिट बना यह महल एक मदरसे के तौर पर काम आता था। वैसे, इस महल में एक सात मंजिला टावर भी बना है, जिसे महमूद ने मेवाड़ के राणा खंबा को हराने के बाद बनवाया था। फिलहाल इस टावर की एक ही मंजिल के अवशेष बाकी हैं।
रेवा कुंड ग्रुप
रेवा कुंड
हालांकि इसे बाज बहादुर ने रूपमति के महल को पानी देने के लिए बनवाया था, लेकिन कुछ वजहों से लोगों की इसमें श्रद्धा है।
बाज बहादुर पैलेस
16वीं शताब्दी की शुरुआत में इस पैलेस को बाज बहादुर ने बनवाया था। इसकी खासियत है, इसके खुले गलियारे हैं, जहां से आस-पास का खूबसूरत नजारा बखूबी देखा जा सकता है।
रूपमति पविलियन
पहले इसे सेना को गश्त लगाने के लिए बनवाया गया था। पहाड़ी की चोटी पर बने इसके गलियारे से रानी रूपमति बाज बहादुर के महल और नीचे बहती नर्मदा नदी के नजारों को निहारा करती थी।
इन्हें भी देखें
मांडू में कुछ ऐसे मॉन्युमेंट्स भी हैं, जो किसी कैटिगरी में नहीं आते, लेकिन देखने लायक हैं। इन्हीं में एक है नीलकंठ। पहाड़ी की उंचाई पर बना यह एक पुराना शिव मंदिर है, जहां आज भी लोग पूरी आस्था के साथ जाते हैं। इसी के पास नीलकंठ महल है, जिसे बादशाह अकबर की एक हिंदू पत्नी के लिए बनवाया गया था। यह महल मुगल आर्किटेक्चर का एक बेहतरीन नमूना है। साथ ही, हाथी महल, दरिया खान का मकबरा, दाई का महल, जाली महल जैसी जगहें भी हैं, जो अपने नामों की तरह ही दिलचस्प हैं। इनके अलावा, ईको पॉइंट, लोहानी केव्स, सनसेट पॉइंट वगैरह भी ऐसे टूरिस्ट पॉइंट्स हैं, जहां गए बिना आप मांडू का पूरा मजा नहीं ले पाएंगे।
कैसे जाएं
मांडू से नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर है, जो दिल्ली व भोपाल से जुड़ा है। यहां से मांडू की दूरी 99 किमी है। अगर ट्रेन से जाना चाहते हैं, इंदौर व रतलाम नजदीकी स्टेशन हैं। रतलाम मांडू से 124 किमी दूर है। वैसे, इंदौर, रतलाम, भोपाल वगैरह से मांडू के लिए अच्छी बस सर्विस है।
कब जाएं
मांडू जाने के लिए जुलाई से मार्च के बीच का वक्त बेस्ट है।
कहां ठहरें
मांडू में रुकने के अच्छे ऑप्शंस उपलब्ध हैं। आप चाहें तो इंदौर को भी अपना हॉल्ट बना सकते हैं।