दिल्ली का 'ताजमहल' देखो

आज हम आपको ले जा रहे हैं एक ऐसी जगह, जो भारतीय उपमहाद्वीप का पहला गार्डन-मकबरा है। ताजमहल के आर्किटेक्चर में जो कारीगरी देखने को मिलती है, वह काफी हद तक इससे प्रभावित है। इस खूबसूरत जगह का नाम है हुमायूं का मकबरा। इस मकबरे को हुमायूं की बड़ी रानी और विधवा बेगा बेगम ने बनवाया था, जो हाजी बेगम के नाम से लोकप्रिय थीं। कुछ लोग कहते हैं कि यह मकबरा उन्होंने हुमायूं की मौत के 9 साल बाद 1565 में बनवाया थी। वैसे 18वीं सदी की एक पांडुलिपि के मुताबिक, इसे हुमायूं की मौत के 14 साल बाद बनवाया गया था। 

ताज की झलक 
अगर आपने अब तक ताजमहल नहीं देखा है, तो हमारी सलाह है कि पहले इसे देख लें वरना आप भी ताजमहल देख चुके लोगों की तरह इसे उसकी नकल मान बैठेंगे। सचाई यह है कि ताजमहल का आर्किटेक्चर इससे प्रेरित होकर तैयार किया गया। ताजमहल से पहले बना यह मकबरा एक बड़े से चबूतरे पर बना है, जिसकी ऊंचाई 47 मीटर है। 

मुगलों की शयनागार 
इस मकबरे के भीतर मुगल परिवार की 100 से ज्यादा कब्र हैं, जिसके कारण इसका नाम मुगलों का शयनागार पड़ा। हालांकि, कब्रों को पहचानना संभव नहीं है। जो यहां दफन हैं, उनमें बेगा बेगम, हमीदा बानू बेगम, हुमायूं की छोटी बेगम, शाहजहां का बेटा दाराशिकोह और बाद के मुगल जहांदार शाह, रफीउद्दरजात, रफीउद्दौला और आलमगीर द्वितीय हैं। बहादुरशाह द्वितीय दिल्ली का अंतिम मुगल बादशाह था, जिसने आजादी की पहली लड़ाई के दौरान तीन शहजादों के साथ इसी मकबरे में शरण ली थी। लेफ्टिनेंट हडसन ने 1857 में यहां उसे पकड़ लिया था। 

पारसी चारबाग स्टाइल 
इसके आर्किटेक्ट मिरक मिर्जा गियास ने इसे पारसी चारबाग (स्क्वेयर फोर गार्डन) स्टाइल में डिजाइन किया। यह मकबरा इंडियन आर्किटेक्चर में फारसी प्रभाव का सबसे पहला उदाहरण है। मकबरा चारों तरफ से ग्रीन लॉन से घिरा है, जो मुगल आर्किटेक्चर का शानदार नमूना है। लाल पत्थर और सफेद संगमरमर का इस्तेमाल इतनी ज्यादा मात्रा में किए जाने का यह पहला उदाहरण है। 

क्या : हुमायूं का मकबरा 
कहां : मथुरा रोड, लोदी रोड क्रॉसिंग के पास 
टाइम : सुबह 7:30 से शाम 7 बजे तक (हफ्ते के सातों दिन) 
एंट्री टिकट : 10 रुपये (15 साल तक के बच्चों की एंट्री फ्री)